Monday, April 23, 2012

बन तू मेरी हीरिये

अभी अभी कुछ पंक्तियाँ  पढ़ी जिसमें हीर रांझे से बोलती है कि सब छोड़ मेरे पास आजा| वे पंक्तियाँ पढ़ कर मष्तिस्क में उन्माद हुआ और कुछ पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार बनी -

ना बिन तेरे जग मेरा हीरिये, ना बिन तेरे ये जीवन
छोड़ के सब में आयूँ दर तेरे, ना बिन तेरे मुझे चैना
मिलने तो तुझसे ये जग छोडूँ, छोडूँ में प्राण पखेरू
तू बस मेरी बन जा, क्या हो सांझ क्या सवेरा 


ना तू अपने नैनो से नीर बहा कि जलता है लहू मेरा
ना तू जग में यूँ गिडगिडा कि धधकती है आँखों में ज्वाला
बस तू मेरी बन जा, छोड़ दूं में ये जग सारा
ना बिन तेरे ये जग मेरा, ना बिन तेरे मेरा जीवन

1 comment:

Anonymous said...

ban tu meri hiriye punjaabi da gana siga aur tune jawab hindi vichh likh ditta, oye kotya, thodi te sharam kariya karo